हर्षोउल्लास से मनाया गया वाल्मिकि जन्मोत्सव |
October 14th, 2019 | Post by :- | 128 Views

हसनपुर पलवल (मुकेश वशिष्ट) :-  कस्बा हसनपुर में महर्षि वाल्मिकि का जन्मोत्सव बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया | रविवार देर शाम को कस्बे के मेन बाज़ार से सुन्दर व मनमोहक झांकियां निकाली गई | मंच के माध्यम से महर्षि बाल्मीकि द्वारा रचित हिन्दू धर्म के माहाकव्य रामायण के आदेशों को अपनाने का संदेश दिया गया |

कथाओं में वर्णित है कि एक बार उन्होंने वन से गुजर रहे साधुओं की मंडली को ही हत्या की धमकी दे दी। साधु के पूछने पर उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि वे यह सब अपने पत्नी और बच्चों के लिए कर रहे है। तब साधु ने उन्हें समझाइश दी और कहा कि जो भी पाप कर्म तुम कर रहे हो, उसका दंड केवल तुम्हें ही भुगतना पड़ेगा।

तब साधु ने उन्हें कहा कि तुम जाकर अपने परिवार वालों से पूछकर आओ कि क्या वे तुम्हारे इस पाप के भागीदार बनेंगे। इस बात पर जब उनकी पत्नी और बच्चों ने अपनी असहमती प्रदान की और कहा कि हम आपके इस पाप कर्म में भागीदार नहीं बनेंगे। तब वाल्मीकि को अपने द्वार किए गए पाप कर्म पर बहुत पछतावा हुआ और उन्होंने साधु मंडली को मुक्त कर दिया।
साधु मंडली से क्षमा मांग कर जब वाल्मीकि लौटने लगे तब साधु ने उन्हें तमसा नदी के तट पर ‘राम-राम’ नाम जप ही अपने पाप कर्म से मुक्ति का यही मार्ग बताया। लेकिन भूलवश वाल्मीकि राम-राम की जगह ‘मरा-मरा’ का जप करते हुए तपस्या में लीन हो गए। इसी तपस्या के फलस्वरूप ही वह वाल्मीकि के नाम से प्रसिद्ध हुए और रामायण की महान रचना की। इसलिए उन्हें आदिकवि के नाम से पुकारा गया और यही नाम आगे चलकर ‘वाल्मीकि रामायण’ के नाम से अमर हो गए।

इस अवसर ग्रामीण रघुवीर पारखी, रघुराज, पुरनसिंह, हरिकिशन मेम्बर,फत्तेसिंह, राजू, संजय, विजय, रवि, आदि व अन्य गणमान्य मौजूद रहें |

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।