बच्चों से लेकर किशोरों के व्यक्तित्व को ऐसा बनाया जाए कि वो तनाव को दूर रख सकें और हर परिस्थिति में खुश रहें- डॉ. दीपकराज
May 14th, 2024 | Post by :- | 120 Views

बच्चों से लेकर किशोरों के व्यक्तित्व को ऐसा बनाया जाए कि वो तनाव को दूर रख सकें और हर परिस्थिति में खुश
रहें- डॉ. दीपकराज

 -डॉ. दीपकराज गंगापुर सिटी से शीघ्र कर रहे हैं हैप्पी एज्युकेशन मिशन का आगाज
गंगापुर सिटी। कोटा के बाद छोटी शिक्षा नगर के लिए प्रसिद्ध गंगापुर सिटी में अब शीघ्र ही हैप्पी एज्युकेशन मिशन की शुरुआत होने वाली है। इसका बीड़ा उठाया है शहर के क्रिएटिव पब्लिक सीनियर सैकंडरी स्कूल के निदेशक डॉ. दीपक राज ने। डॉ. दीपकराज से इस मिशन को चलाने के बारे में पूछे जाने पर बताया कि कोटा में देशभर से बच्चे पढ़ाई के लिए जाते हैं और असफल होने पर सुसाइड जैसा कदम उठा लेते हैं। इसके पीछे अभिभावक और समाज की बच्चे से वे अपेक्षाएं है, जिन्हें सभी लोग पूरा नहीं कर पाते हैं। ऐसे में आज हैप्पी एज्युकेशन की जरुरत हैं। यानि बच्चे पर पढ़ाई का तनाव नहीं दिया जाए और उसकी ईच्छा के अनुरुप पढ़ाई कर उसके कॅरियर का चयन करने की स्वतंत्रता दी जाएगी। इसके लिए निशुल्क रुप से पूरे शहरवासियों के लिए हैप्पी एज्युकेशन अभियान की शुरुआत जल्द की जाएगी। उन्होंने बताया कि विद्यालय केवल एक संस्था नहीं है जहाँ बच्चे शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। यह एक ऐसी जगह है जहां वे सीखते हैं, बढ़ते हैं, दोस्त बनाते हैं और जीवन भर याद रखने योग्य यादें बनाते हैं। यह एक ऐसी जगह है जहां वे एक व्यक्तित्व, चरित्र, मूल्यों और विश्वासों का विकास करते हैं जो जीवन भर उनके साथ रहते हैं। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि स्कूल में प्राप्त अनुभव किसी व्यक्ति की बाद के जीवन में सफलता और खुशहाली को निर्धारित करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इसलिए, सीखने के माहौल के लिए सुरक्षित, स्वस्थ, खुशहाल और उत्साहवर्धक होना आवश्यक है। असुरक्षित शिक्षण वातावरण सभी शिक्षार्थियों के लिए शिक्षा की गुणवत्ता को कम कर देता है। प्रभावित शिक्षार्थी कक्षा में भाग लेने से बच सकते हैं या कम भाग ले सकते हैं या पूरी तरह से स्कूल छोड़ सकते हैं। उनमें चिंता, मनोवैज्ञानिक तनाव और अवसाद का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे समय में जब अच्छे ग्रेड, परीक्षा, सह-पाठयक्रम गतिविधियों के दबाव के साथ-साथ अत्यधिक स्क्रीन समय बच्चों में चिंता और तनाव के उच्च स्तर का कारण बन सकता है। एक स्कूल जो अपने वातावरण में सकारात्मकता और खुशी को प्रोत्साहित करता है वह छात्रों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर ला सकता है। जब स्कूल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हैं और स्कूल में एक खुशहाल माहौल बनाने का प्रयास करते हैं, तो छात्र स्कूल आने के लिए प्रेरित होते हैं। इससे न केवल बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन होता है बल्कि स्कूल और समाज में ईमानदार रिश्ते भी बनते हैं। एक  खुशहाल स्कूल का  माहौल एक समृद्ध सीखने का अनुभव प्रदान करता है और छात्रों की प्रतिभा को निखारता है। यह गतिविधियों को प्रेरित करता है, रचनात्मकता को बढ़ावा देता है और सामाजिक रिश्तों को मजबूत करता है। दूसरी ओर, स्कूल के माहौल में खुशी की कमी के कारण अरुचि या  छिपी हुई पलायन की भावना पैदा हो सकती है । इसका मतलब यह है कि छात्र न तो कक्षा से भागते हैं और न ही स्कूल से अनुपस्थित होते हैं बल्कि वे उदासीन रवैये के साथ कक्षाओं में उपस्थित होते हैं जिसके परिणामस्वरूप प्रदर्शन में कोई प्रगति नहीं होती है।

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