श्रीलंका के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से रंगा ब्रहमसरोवर का वातावरण
December 24th, 2023 | Post by :- | 203 Views
कुरुक्षेत्र 24 दिसंबर अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव-2023 में श्रीलंका को पार्टनर कंट्री के रुप में आमंत्रित किया गया। इस देश के कलाकारों ने भारत वर्ष की प्राचीन संस्कृति को सहेजने का काम किया है। इसकी झलक महोत्सव के मुख्य मंच ब्रहमसरोवर पुरुषोतमपुरा बाग में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान देखने को मिली। इस देश के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को नाटक डांस ड्रामा और म्यूजिक का समावेश करके अनोखे अंदाज में प्रस्तुत किया।
महोत्सव में गत्त देर सायं ब्रहमसरोवर पुरुषोतमपुरा बाग के मुख्य मंच पर पार्टनर कंट्री श्रीलंका के कलाकारों ने अपनी शक्तियों के माध्यम से भारत की संस्कृति का जुड़ाव देखने को मिला। इस सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ अतिरिक्त उपायुक्त अखिल पिलानी और नगराधीश हरप्रीत कौर ने किया और इन सभी कलाकारों को स्मृति चिन्हे देकर सम्मानित भी किया। इस सांस्कृतिक संध्या में श्रीलंका के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की वंदना से कार्यक्रम का आगाज किया और महाभारत और श्रीकृष्ण की लीलाओं को अच्छे अंदाज में प्रस्तुत करके दर्शकों का मन जीत लिया। इन कलाकारों ने अपने डांस ड्रामा से भगवान श्रीकृष्ण की जीवन लीलाओं के हर पहलू को छूने का प्रयास किया।
श्रीलंका के सांस्कृतिक मंत्री विदुरा विक्रमानायके ने भी महोत्सव का दौरा किया था और इस महोत्सव को देखकर उन्होंने भी तुरंत निर्णय लिया कि वर्ष 2024 में श्रीलंका की धरा पर अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने आरती स्थल पर कहा कि अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव-2024 का आयोजन श्रीलंका में भी भव्य और हर्षोल्लास के साथ किया जाएगा। इस पावन धरा पर पांव रखते ही आध्यात्मिकता और भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद की अनुभूति हुई। इस धरा पर हजारों वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के उपदेश दिए जो आज भी पूर्णत: प्रासंगिक है। इन उपदेशों का अनुसरण करने के लिए श्रीलंका के नागरिकों को भी प्रेरित और जागरुक किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता की पावन धरा पर पहुंचने पर आध्यात्मिका का एहसास हुआ। इस ग्रंथ के उपदेशों से पूरी मानवता को शांति का संदेश मिल रहा है। इस ग्रंथ के उपदेश कलयुग के ही नहीं अपितु भविष्य के लिए भी पूरी तरह प्रासंगिक है। इस ग्रंथ के उपदेशों का अनुसरण करते हुए एक-दूसरे को समझने का प्रयास करना चाहिए और पूरे विश्व को शांति की राह पर आगे बढऩा चाहिए। इस ग्रंथ के उपदेशों को समझने के साथ-साथ अपने जीवन में धारण करने की जरुरत है। इन उपदेशों का अनुसरण करके ही कोई भी देश तरक्की की राह पर आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि इस ग्रंथ के उपदेशों से मन शुद्घ होता है और जब मन शुद्घ होगा तो धर्म जाति को भूलकर मानवता के सूत्र में बंध जाएगा। जब पूरी मानवता एक सूत्र में बंध जाएगी तो निश्चित ही विश्व में शांति स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि इस पावन धरा पर अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव को देखकर निर्णय लिया गया है कि आगामी वर्ष यानि वर्ष 2024 में श्रीलंका की धरा पर अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जाएगा ताकि श्रीलंका के लोग भी पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों से आत्मसात होंगे।

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