हरियाणवी संस्कृति की अमिट छाप छोड़ गया कुवि का हरियाणा पैवेलियन हरियाणवी व्यंजन
December 24th, 2023 | Post by :- | 129 Views
कुरुक्षेत्र 24 दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा ब्रह्मसरोवर के पुरुषोत्तमपुरा बाग में आयोजित हरियाणा पैवेलियन हरियाणवी संस्कृति की अमिट छाप छोड़ गया। 17 दिसंबर को हरियाणा पैवेलियन का उद्घाटन महामहिम उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया था। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी उपस्थित थे। 8 दिन तक चले हरियाणवी पांडाल में जहां एक ओर हरियाणवी व्यंजन पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहे वहीं पर दूसरी ओर हरियाणवी संगीत एवं हस्तकला का ऐसा समागम रहा कि लाखों पर्यटक हरियाणा पांडाल का अवलोकन कर पाए।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा की प्रेरणा से हरियाणवी पैवेलियन लाखों लोगों के विशेष आकर्षण का केन्द्र बना रहा। यहां पर महामहिम उपराष्ट्रपति से लेकर राज्यपाल के साथ-साथ फिल्म अभिनेता, यशपाल शर्मा, राज्यमंत्री अनूप धानक, शिक्षा मंत्री मूलचंद शर्मा, थानेसर विधायक सुभाष सुधा सहित अनेक महान हस्तियों ने हरियाणवी पैवेलियन का अवलोकन किया। इस पैवेलियन में सुबह 10 बजे से शाम को 6 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की ऐसी झड़ी लगी कि ग्रामीण दर्शक हजारों की संख्या में हरियाणवी संस्कृति के दर्शन कर पाये। पर्यटकों के लिए हरियाणवी व्यंजन खीर, चूरमा, कसार, जलेबी, खिचड़ी, दलिया, रागी के गोलगप्पे, गाजर का हलवा, गुड का हलवा, गुड के चावल, गुड की चाय पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रही।
डॉ. पूनिया ने बताया कि हरियाणवी पैवेलियन के सांस्कृतिक मंच से हरियाणा की लुप्त होती गायन शैलियों जैसे गंगा स्तुति, शिव स्तुति, दोहा, सवैया, गूगा, देवी स्तुति, चमोला, मंगलाचरण, सोहनी, बहरेतबील, काफिया, नसीरा, सोरठा, आल्हा आदि को रागनियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। हरियाणवी दर्शकों ने इन शैलियों को खूब पंसद किया। इसके साथ ही हरियाणवी नृत्य धमाल, खोडिय़ा, लूर, रसिया आदि की प्रस्तुति ने भी पर्यटकों का मन मोह लिया। डॉ. पूनिया ने बताया कि पैवेलियन में 70 से अधिक हरियाणवी स्टॉल लगाए गए थे, जिनमें हरियाणवी पगड़ी, धरोहर, दरी बुणाई, फुलझड़ी, खाट बुणाई, प्राचीन सिक्के, लकड़ी की कला, छपाई कला, लोक परिधान के साथ-साथ हरियाणा की पुरातन विरासत की प्रदर्शनी दर्शकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी रही। हरियाणा पैवेलियन ने 8 दिनों में लाखों लोगों को जोडकऱ हरियाणवी संस्कृति का जो संदेश दिया है उससे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की गरिमा बढ़ी है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो0 सुचि सुमिता, डा0 ज्ञान चहल, डा0 सुशील टाया, डा0 आबिद अली, डा0 हरविन्द्र राणा ने विशेष योगदान दिया।

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