उद्योग,वाणिज्य प्रतिष्ठान व आम उपभोक्ताओं से सरकारी हठधर्मिता व विद्युत विभाग द्वारा वसूले जा रहे फ्यूल सरचार्ज, विशेष फ्यूल सरचार्ज, सोलर सरचार्ज व अन्य शुल्क को लेकर धरना
July 21st, 2023 | Post by :- | 63 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । वर्तमान समय में राज्य सरकार तथा डिस्कॉम द्वारा सभी प्रकार के विद्युत बिलों पर फ्यूल सरचार्ज तथा स्पेशल फ्यूल सरचार्ज के नाम पर गैर कानूनी वसूली जनता से की जा रही है, जिसका सबसे ज्यादा भार उद्योग तथा व्यापार पर पड़ रहा है। विभिन्न प्रकार के प्रयासों के बावजूद भी यह वसूली रोक पाना संभव नहीं हो पा रहा है। इन परिस्थितियों में हमारे सामने एकमात्र रास्ता आंदोलन का ही रह जाता है और इसी को ध्यान में रखते हुए हमारी संस्था लघु उद्योग भारती ने प्रदेश स्तर पर यह योजना बनाई है कि यह संघर्ष,यह विरोध किसी एक व्यक्ति या संस्था का न होकर सम्पूर्ण औद्योगिक तथा व्यापार जगत का बनना चाहिए और इसकी गूंज प्रदेश सरकार तक पहुंचनी चाहिए। इसी क्रम में एक सांकेतिक धरने का आयोजन प्रदेश स्तर पर किया जा रहा है, जो पूरे प्रदेश में 50 से अधिक स्थानों पर एक साथ एक ही समय पर आयोजित किए जाने की योजना है। जयपुर में यह धरना क्लैक्ट्रेट सर्किल पर आयोजित किया गया है।
प्रदेश स्तर पर किये जाने वाले इस विरोध प्रदर्शन से निश्चित रूप से सरकार और विद्युत मंत्रालय तक सामूहिक आवाज जाएगी और उनके निर्णय में जनहित में परिवर्तन किया जायेगा, ऐसी आशा है। फ्यूल सरचार्ज सिर्फ व्यापारिक या उद्योग इकाइयों के लिए परेशानी नहीं है, अपितु हर आम व खास के लिए परेशानी का कारण है।
राजस्थान राज्य उद्योगों एवं व्यवसायिक संस्थानों को देश में सबसे अधिक दरो पर महंगी बिजली देने वाले राज्यों में से प्रमुख है। इस कारण नये उद्योग व व्यवसायिक संस्थान राजस्थान में निवेश करने से कतराते है।
कुछ क्षेत्रों को दी जाने वाली सस्ती बिजली एवं निशुल्क बिजली की भरपाई उद्योगों से अधिक दर पर बिजली आपूर्ति करके वसूली जाती है।
अब कोयला खरीद की अव्यवस्था एवं लापरवाही को भी विशेष फ्यूल सरचार्ज के नाम से उद्योगों के माथे मढ़ा जा रहा है।
फ्यूल सरचार्ज व स्पेशल फ्यूल सरचार्ज के नाम पर विद्युत बिलो में बढ़ी हुई राशि दुगुनी से भी ज्यादा विद्युत निगमों की अकर्यण्ता व घोर लापरवाही-लघु उद्योगों व व्यापर जगत को भारी नुकसान हो रहा है।
विद्युत निगमो द्वारा वर्ष 2022 2023 के चार तिमाही का फ्यूल सरचार्ज पिछले दो माह से बिजली बिलों में वसूला जा रहा है। वर्ष 2022-23 का फ्यूल सरचार्ज पिछले वर्षों के बिजली बिलों में लिया जाना चाहिये था, अब वर्ष समाप्ति पर इसे विद्युत बिलो मे जोडना विद्युत अधिनियमों के विपरीत है तथा उपभोक्ताओं के साथ एक तरह से धोखा-धोखाधड़ी है।
घटिया कोयले की खरीद, कोयले की उपलब्धता में कमी विदेशों से चार गुना महंगा कोयला खरीदना तथा तापीय विद्युत गृहों की सही रखरखाव नही रखवाना तथा सोलर एण्ड बिन्ड प्लांट्स द्वारा उत्पादन के नाम पर बार बार तापीय विद्युत गृहों को बन्द करना, निगमों में घोर निकम्मापन, अपारदर्शिता तथा जिम्मेदारी का अभाव दर्शाता है।
इसी वजह से विद्युत बिलों में फ्यूल सरचार्ज व स्पेशल फ्यूल सरचार्ज जोड़ा जाकर 59 पैसे प्रति यूनिट तथ पिछले बारह महिनों का बकाया जोडकर हर माह वसूला जा रहा है। निगमों से अडानी पावर लि. द्वारा 11268 /- करोड़ो रूपये आयतित कोयले के कारण अतिरिक्त विद्युत उत्पादन पर खर्च की राशि उपभोक्ताओं से बिजली बिलो से वसूला जा रहा है।
अभी निगमो द्वारा आरईआरएल मे एक याचिका प्रस्तुत कर अडानी पॉवर लि से 4647 करोड रूपये के अतिरिक्त भुगतान वापिस करने की मांग की गयी है। निगमों का कहना है कि यह राशि अडानी पॉवर द्वारा निगमों से फालतु वसूल कर ली है। क्या यह निगमों की उदासीनता नही दर्शाता है। अब उपभोक्ताओं से यह राशि 7 पैसे प्रतियूनिट के हिसाब से अगले 5 वर्षों में वसूलने का क्या औचित्य है यह वसूली तुरन्त प्रभाव से बन्द करनी चाहिये तथा स्पेशल फ्यूल सरचार्ज जो गलत तरीके से आंका गया है। उसे बिलो से हटाना चाहिये तथा जो राशि वसूली जा रही हैं। उसे तुरन्त प्रभाव से उपभोक्ताओं को निगमों द्वारा वापिस करना चाहिये।
विद्युत निगमों की हठधर्मी तथा पूर्ण रूप से निगमों की खराब कार्यशीलता को दर्शाता है और सारे विद्युत उपभोक्ता बढ़े हुए बिजली बिल से त्राही त्राही कर रहे है। खास तौर से लघु उद्योग व व्यापार से संबंधित उपभोक्ता जिनका हर माह विद्युत बिल हजारो में आता रहता है वह अब दोगुने से भी ज्यादा आ रहा है। कुछ सेक्टर मे ये राशि लाखो रूपये प्रतिमाह वसूली जा रही है।
विदेशों से निम्नस्तरीय कोयले के आयात के कारण हुई लापरवाही को भी उद्योगों के सिर पर लादा जा रहा है।
अडानी समूह को किये गये 4647 करोड़ रूपये के अतिरिक्त भुगतान को भी उद्योगो से वसूल करने की तैयारी की जा चुकी है।
सौर उर्जा क्षेत्र से सस्ती बिजली की अनुबन्धों को हतोत्साहित करके महंगी बिजली खरीदने के मार्ग अपनाये जा रहे है। उद्योगों को सौर उर्जा उत्पादित करने से रोकने के मार्ग विद्युत विभाग द्वारा अपनाये जा रहे हैं। विद्युत उत्पादन कम्पनियो द्वारा कोयले का कुप्रबंधन अर्थात् देरी से किये गये भुगतान के कारण उत्पन्न हुए ब्याज व पैनल्टी के भुगतान को भी उद्योगों पर स्थानान्तरित किया जा रहा है। एनर्जी एक्सचेंज से डिस्कॉम के लिये बिजली खरीद हेतु राजस्थान उर्जा विकास निगम लि.में चतुर अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होने के कारण महंगी बिजली खरीदी जाती है। ये भार भी उद्योगो पर स्थानान्तरित किया जाता है। सभी औद्योगिक क्षेत्रों में मॉनिटरिंग व्यवस्था स्थापित है जिससे उस उद्योग क्षेत्र में होने वाले ट्रान्समीशन लॉसेंस का पता चल जाता है लेकिन इन तथ्यो को सार्वजनिक नहीं किया जाता है इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे भारी ट्रांसमिशन लॉर्सेस को भी उद्योगों से वसूलने की मानसिकता विद्युत वितरण निगमों की बन चुकी है। यह मानसिकता उद्योग विरोधी मानसिकता है हमारा सुझाव है कि जिन औद्योगिक क्षेत्रों की छीजत कम आती है उस क्षेत्र के औद्योगिक व व्यावसायिक संस्थानों को विद्युत दरो मे पॉवर फैक्टर की तर्ज पर प्रोत्साहन राशि दी जानी चाहिये। राज्य सरकार कृषि विद्युत संबंधो को सौर उर्जा प्रकरण लगाकर कम दर की बिजली उपलब्ध करवायी जानी चाहिये। सरकार इस प्रकार की योजनाओं मे कोई रूचि नहीं ले रही है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। वास्तव ने तो सौर उर्जा उत्पादन को प्रोत्साहन देकर विद्युत विभाग को सस्ती बिजली खरीदकर एनर्जी एक्सचेंज पर ऊचे दामों पर बेचना चाहिये ताकि अतिरिक्त आय से उद्योगों को विद्युत दरो मे राहत दी जा सके एवं औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। कोटा ताप बिजलीघरो को कोयला की उपलब्धता 97 प्रतिशत रहती है लेकिन कोटा से बेहतर प्रौद्योगिकी वाले सूरतगढ़ ताप बिजलीघर के लिये कोयले की उपलब्धता 46 से 52 प्रतिशत ही रखी जाती है जिस कारण सूरतगढ़ ताप बिजली का भरपूर उपयोग नहीं हो पाता है एवं राजस्थान को एनर्जी एक्सचेंज से उंचे दामो पर बिजली खरीदनी पड़ती है। इस प्रबंधन में भारी
सुधार की आवश्यकता है।
सौर उर्जा उत्पादन को हतोत्साहित करने के लिये रूफटॉप सोलर प्लांट की सीमा को 500 किलोवॉट तक प्रतिबंधित किया गया है। कारण बताया जाये। सौर उर्जा पॉलिसी 2019 में 7 वर्ष की छूट का प्रावधान होने के उपरान्त भी सौर उर्जा उत्पादन पर इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की जबरन वसूली की जा रही है। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग का गठन राजस्थान सरकार द्वारा राज्य द्वारा नियंत्रित किसी वरिष्ट प्रशासनिक अधिकारियों के पदस्थापन द्वारा किया जाता है। इस विनियामक आयोग में औद्योगिक व व्यावसायिक संगठनों क्षेत्रवार प्रतिनिधियों की नियुक्ति नहीं की जाती,न ही न्यायिक क्षेत्र के अनुभवी लोगों का इस नियामक आयोग में कोई भूमिका होती हैं। अर्थात् यह नियामक आयोग कहने के तो एक स्वतंत्र नियामक संस्था है किन्तु वास्तव में यह नियामक आयोग राज्य सरकार की तरफदारी करता हुआ प्रतीत होता है एवं राज्य सरकार के आन्तरिक निर्देशों को उद्योगों एवं व्यावसायिक संस्थानों पर थोपने का कार्य करता है।
*प्रमुख मांग:
लघु उद्योग भारती विद्युत उपभोक्ता संघर्ष समिति यह मांग करती हैं कि फ्यूल सरचार्ज के नाम पर किया जा रहा उद्योग एवं व्यापार जगत का शोषण तुरन्त रोका जाये। स्पेशल फ्यूल सरचार्ज के नाम पर की जा रही अवैध वसूली को तुरन्त समाप्त किया जाये एवं जिन लोगो ने अभी तक इस मद में जो राशि जमा करावा दी है उसका समायोजन किया जाये या रिफण्ड किया जाये। राजस्थान में विद्युत उत्पादन केन्द्रों की कोयला खरीद की प्रक्रिया को कुशल वैज्ञानिक प्रबंधन द्वारा राज्यहित में सुदृढ़ किया जाये ताकि उत्पादन केन्द्रो पर पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले कोयले का समुचित भण्डार सदैव उपलब्ध रहे। आयातित कोयले की गुणवत्ता के अनुसार ही मूल्य का भुगतान किया जाये। कोयला कम्पनियों को तय समय पर भुगतान कर दिया जाये ताकि ब्याज की मार उत्पादन कम्पनियों पर नहीं पड़े एवं इस प्रकार हुए नुकसानो की भरपाई करने का सरल सा मार्ग स्पेशल फयूल सरचार्ज के नाम पर बनाकर उद्योग एवं व्यावसायिक पर थोपने पर आवश्यकता नहीं पड़े। अनुसार ही मूल्य का भुगतान किया जाये। कोयला कम्पनियो को तय समय पर भुगतान कर दिया जाये ताकि व्याज की मार उत्पादन कम्पनियों पर नहीं पड़े एवं इस प्रकार हुए नुकसानो की भरपाई करने का सरल सा मार्ग स्पेशल फयूल सरचार्ज के नाम पर बनाकर उद्योग एवं व्यावसायिक पर थोपने पर आवश्यकता नहीं पड़े। यह संघर्ष समिति स्पष्ट शब्दो मे यह चेतावनी दे रही है कि वर्तमान में लगाये गये फयूल सरचार्ज एवं स्पेशल फ्यूल सरचार्ज की वसूली तुरन्त रोकी जाये। यह धरना जिसमे 20 से भी अधिक औद्योगिक व व्यापारिक संगठनो ने अपनी सामूहिक भूमिका अदा की है। इसे गंभीरता से लिया जाये एवं तुरन्त हमारी मांगों को माना जाये। यदि हमारी मांगों पर शीघ्र निर्णय नही लिया गया तो संघर्ष समिति लोकतात्रिक तरीकों से अपने आन्दोलन को और तेज करने के लिये विवश होगी। सौर उर्जा को राज्य सरकार हतोत्साहित करने के बजाय प्रोत्साहित करे ताकि राजस्थान की सौर उर्जा उत्पादन की विराट संभावनाओ को मूर्त रूप देकर रारती बिजली का उत्पादन विभिन्न स्तरों पर किया जा सके एवं सौर उर्जा उत्पादन से राजस्थान विद्युत निर्यातक राज्य बन सके जिससे न केवल उद्योगो व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लाभ होगा राज्य के राजस्व मे मी आशातीत वृद्धि होगी।

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