सोनीपत के जानकीदास कपूर पब्लिक स्कूल में मनोवैज्ञानिक पहलू विषय पर आयोजित किया गया सेमिनार
July 5th, 2023 | Post by :- | 116 Views

सोनीपत से अश्वनी गोयल की रिपोर्ट

किशोरावस्था निरंतर परिवर्तन व विकास की उम्र है ऐसे में मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य के मद्देनजर हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की राज्यस्तरीय परियोजना बाल सलाह परामर्श व कल्याण केंद्रों की स्थापना के अंतर्गत बुधवार को जानकीदास कपूर पब्लिक स्कूल में मनोवैज्ञानिक पहलू विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया।
मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी रोहतक एवं राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक ने कहा कि किशोर विद्यार्थियों हेतु आत्मबोध और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से बाल सुरक्षा के लिए सेमिनार का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि यू तो 21वीं सदी के भविष्य से जुड़ा एक मुद्दा बड़े ही प्रभावी व असरदार रूप से उभरा है और वह है नैतिकता का खत्म होना। उन्होंने कहा कि अगर हम अपने आसपास के परिवेश में देखें तो महसूस होगा कि नैतिक क्षय हो रहा है अगर किशोर युवाओं ने नहीं संभाला तो इंसानियत खतरे में हो सकती है।
उन्होंने कहा कि नैतिकता का सवाल घर-घर की चिंता होनी चाहिए हालात बदलने चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन को गति देने वाली तकनीक की बदौलत किशोर युवाओं के जीवन में विभिन्न तरह की चुनौतियां पैदा हो रही हैं। आत्मबोध यानी एक तरह का दर्पण जिसमें व्यक्ति स्वयं के द्वारा निर्धारित भूमिकाओं को दूसरों के साथ संबंधों तथा स्वयं के प्रति दूसरों के द्वारा की गई प्रतिक्रियाओं के आधार पर स्व मूल्यांकन करता है। इसी तरह सामाजिक जागरूकता जिसमें दूसरों के बारे में जानने समझने उनकी भावनाओं को पहचानने में सहायता होती है।
अनिल मलिक ने कहा कि सामाजिक जागरूकता के लिए जरूरी है वर्तमान में जीना, अपनी दिमागी अव्यवस्था से बचे रहना, ध्यानपूर्वक सुनना और अवलोकन करने का अभ्यास करना। कोई भी स्वयं को जानकर सामाजिक जागरूक अगर रहेगा तो बाल सुरक्षा के दृष्टिकोण से सुरक्षित रहेंगे। बाल सुरक्षा के मनोवैज्ञानिक पहलू व युक्तियां हैं सुनने का सही मतलब जो कहा जाता है उसे सही से समझें, जो सुना है उसे अपने शब्दों में दोहराएं और जरूरी हो तो अधिक जानकारी हासिल करें। उन्होंने कहा कि अशाब्दिक संकेतों से अवगत रहे, पूरी तरह से उपस्थित रहे, पूरा ध्यान सामने वाले के चेहरे के भाव और शारीरिक भाषा पर लगाएं, सही से अवलोकन करते रहें यह एक तरह का कौशल है जो सामाजिक जागरूकता का मूल भी है। खुद सुरक्षित रहे और दूसरों को जागरूक करें बाल सुरक्षा के प्रति हर व्यक्ति की अहम जिम्मेदारी है।
परामर्शदाता नीरज कुमार ने कहा कि बच्चे अपनी जरूरी आवश्यकताओं को समझें विचारों को माता-पिता से साझा करें बाल सुरक्षा हेतु भावनात्मक समझ विकसित करना जरूरी है। कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता करते हुए जिला बाल कल्याण अधिकारी सुरेखा व स्कूल प्रिंसिपल गीतांजलि ग्रोवर ने कहा कि मनोवैज्ञानिक प्रेरणा बाल सुरक्षा के दृष्टिकोण से जरूरी है जो बच्चों में समय रहते सही समझ विकसित करती है। कार्यक्रम में सहायक कार्यक्रम अधिकारी धर्मपाल व शैला गोयल आदि उपस्थित रहे।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।

आप अपने क्षेत्र के समाचार पढ़ने के लिए वैबसाईट को लॉगिन करें :-
https://www.lokhitexpress.com

“लोकहित एक्सप्रेस” फेसबुक लिंक क्लिक आगे शेयर जरूर करें ताकि सभी समाचार आपके फेसबुक पर आए।
https://www.facebook.com/Lokhitexpress/

“लोकहित एक्सप्रेस” YouTube चैनल सब्सक्राईब करें :-
https://www.youtube.com/lokhitexpress

“लोकहित एक्सप्रेस” समाचार पत्र को अपने सुझाव देने के लिए क्लिक करें :-
https://g.page/r/CTBc6pA5p0bxEAg/review