डॉ बलदेव कुमार अरोड़ा ने अपने नाम का अर्थ समाज को बखूबी समझाया
May 30th, 2023 | Post by :- | 201 Views

*डॉ बलदेव कुमार अरोड़ा की पुण्यतिथि आज*

चंडीगढ़ (मनोज शर्मा)मनीमाजरा में डॉक्टर प्रेमचंद अरोरा और रक्षा रानी के घर 2 दिसंबर 1960 को एक बच्चे का जन्म हुआ। घर में खुशियों की लहर दौड़ पड़ी , खुशी खुशी में बच्चे का नामकरण किया गया और बच्चे का नाम रखा गया बलदेव अरोरा , शायद उस समय परिवार को भी यह पता नहीं था की आने वाले समय में यह बच्चा अपने नाम का अर्थ समाज को बखूबी भी समझाएगा।
डॉक्टर अरोड़ा बचपन से ही एक लायक शिक्षक के साथ साथ एक बहुत मजे हुए खिलाड़ी भी थे। अपनी युवा अवस्था में उन्होंने भारतीय टीम के कप्तान कपिल देव ,जोली शर्मा, योगराज सिंह आदि के साथ क्रिकेट खेला है। 1982 में अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर डॉ अरोरा ने डॉक्टरी की तैयारी शुरू कर दी।
डॉ बलदेव अरोड़ा के पिताजी डॉ प्रेमचंद्र अरोड़ा मनीमाजरा के प्रथम डॉ कहलाते थे। जबकि इनके परदादा हकीम लक्ष्मण दास अरोड़ा राजा फरीदकोट के हकीम थे। डॉ बलदेव अरोरा के एक भाई और 8 बहने है। इनमें से एक बहन ने युवा अवस्था मे ही सन्यास लेकर अपना पूरा जीवन श्री कृष्ण जी के चरणो में समर्पित कर दिया। जो वर्तमान में श्री युगल विहार निकुंज साध्वी बहन उमा सारथी के रूप में संत समाज में बहुत आदरनीय हैं। इसके साथ ही उनकी एक भांजी भजन सम्राट निकुंज कामरा के नाम से प्रसिद्ध है। जबकि बहु नैंसी अरोड़ा जोकि चार्टर्ड अकाउंटेंट है।
11 दिसंबर 1988 को डॉ बलदेव अरोरा का विवाह शिमला निवासी रोणक लाल और पुष्पा रानी की पुत्री  नीलम से हुआ। डॉ बलदेव अरोरा शुरू से ही सामाजिक कार्यों में रुचि रखते थे। वो संघ के स्वयंसेवक व भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के रूप मे जाने जाते थे। उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में पैसे से ज्यादा इंसानियत को अहिमत दी, बलदेव अरोड़ा जिस सामाजिक कार्य कर कर समाज को अपने नाम का मतलब बखूबी समझाया।
जब कोई मरीज उनसे दवा लेने आता था और डॉ को पता चल जाए कि मरीज  के पास केवल दवा के पैसे है या पैसे नहीं है तो डॉक्टर साहब उस मरीज को यह तक कह देते थे कोई बात नहीं पैसे बाद में आ जाएंगे। बलिक वो अपने पास से उस मरीज को 20, ₹50 देकर भेजते थे कि जाओ इसका फ्रूट या दूध पी लेना। यही नहीं वो अपना धर्म को निभाते हुए उन्होंने लोगों के घर जा जाकर उनका उपचार करना में कभी भी कोताही नहीं बरती। दिन हो, रात हो या आंधी , तूफान हो उन्होंने इलाज के लिए जाने से कभी भी जवाब नहीं दिया और ना कभी जाने का पैसा लिया।
डॉ बलदेव अरोड़ा ने विश्व मानव रूहानी केंद्र ठाकुर सिंह जी महाराज से नाम दान दीक्षित थे,और अपने डॉक्टर की सेवा भी मानव केंद्र में देते रहे। इसके साथ ही वो भारत विकास परिषद और व्यापार मंडल के साथ भी जुड़े रहे। ऑल मनीमाजरा वेलफेयर एसोसिएशन जो मनीमाजरा की भलाई के लिए काम कर रहा है उसकी स्थापना भी की है। इसमें वो गरीब कन्याओं की शादी करने तक का कार्यभार भी संभालते रहे गरीबों के लिए सदैव तत्पर रह कर काम किया। डॉ बलदेव अरोड़ा ने अपना सरल जीवन जीया। इनका एक बेटा अंकित अरोड़ा अब उनके नक्शे कदम पर चल रहा है ।
30 मई 2022 को सोमवती अमावस्या के दिन डॉ बलदेव अरोड़ा ने शाम 5 बजे श्री ठाकुर चरणों में अपने प्राण त्याग दिए ।

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