बस्तर दशहरा 2019 श्रद्धा, उत्साह और आस्था के अनुठे संगम के साथ हुई छत्रडोलियों की विदाई मुख्यालय में पहली बार देवी-देवताओं की रवानगी पर हुआ भव्य विदाई आयोजन जिले की खुषहाली एवं सुख-समृद्धि की कामना के साथ देवी-देवता हुए विदा
October 7th, 2019 | Post by :- | 164 Views

कोंडागांव( नरेश जैन)–बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए जिलेभर से आए ग्राम देवी-देवताओं की आज मुख्यालय के शीतला माता मंदिर परिसर में श्रद्धा और उत्साह के साथ विदाई दी गई। उल्लेखनीय है पहली बार मुख्यालय स्तर पर जिले के देवी-देवताओं का बस्तर दशहरा में शामिल होने पर विदाई का आयोजन किया गया था। इस मौके पर जिला कलेक्टर नीलकंठ टीकाम ने कहा कि विश्व विख्यात बस्तर दशहरे में कोण्डागांव जिले के प्रमुख देवी-देवताओं, मांझी, मुखिया, गायता, पुजारी एवं परगना प्रमुखों की सहभागिता सदियो की परम्परा रही है। चूंकि पूरे बस्तर संभाग में कोण्डागांव जिले से ही सर्वाधिक देवी देवता छत्रडोलियाँ एवं तथा समाज प्रमुख भाग लेते आ रहे है। अतः इस आदिम संस्कृति और परम्परा को जीवित रखने के उद्देश्य से ग्राम देवी-देवताओं की भव्य विदाई का आयोजन किया गया है। बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की पूजा और उपासना प्राचीन बस्तर संस्कृति का अटूट अंग रहा है, इसे देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा यह प्रयास किया गया है। उल्लेखनीय है कि बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए जिले के अलावा उड़ीसा राज्य के सीमावर्ती गांव के देवी-देवता भी प्रस्थान कर रहे है इनमें ग्राम रांधना, कोकोड़ी एवं बालोण्ड, भाटगांव, पिटिसपाल, पाथरी, बालेंगा, माण्डोकीखरगांव, खुटडोबरा, चरकई, खालेपारा, कोपाबेड़ा, अरगुला, तारगांव, छोटेराजपुर, किबेकोंगा, डोडरेसिमोड़ा, तितरवण्ड, बड़डोई, डोंगरसिलाटी, हल्दा, बिवला, आमानार, गम्हरी, फुण्डेरपानी, गडरासिमोड़ा गांव से माँ हिगंलाजिंन, मावली माता, आंगादेव, बुढ़ी माता, शीतला माता, चिलगाईन माता, फुलकुवर, कुवारी मावली, सोनादई, भण्डारिन माता जैसे ग्राम देवी-देवता सम्मिलित होंगे। इस दौरान ग्राम पुजारियों ने चर्चा करते हुए बताया कि उनके पूर्वज ब्रिटिश काल से ही बस्तर दशहरा में सम्मिलित होते रहे है इसके लिए पूर्व में ग्रामीण चार-पांच दिन पहले ही छत्रडोलियो एवं अन्य लाव-लश्कर के साथ पदयात्रा प्रारंभ कर देते थे, समय के साथ अब जाने के लिए वाहनो का उपयोग हो रहा है। ग्रामीणों ने मौके पर जिला प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि पहली बार पूरी श्रद्धा, सम्मान एवं सुविधाओं के साथ उन्हें रवानगी दी जा रही है, इसके लिए जिला प्रशासन साधूवाद का पात्र है।
ज्ञातव्य है कि जिला प्रशासन द्वारा सभी ग्राम पुजारी, मांझी, मुखिया एवं गायताओं के लिए रुकने एवं भोजन की व्यवस्था पूर्व से ही जिला मुख्यालय में कर दिया गया था। इसके अलावा मुख्यालय जगदलपुर में भी जिले से गए ग्रामीणों के लिए आवश्यक व्यवस्थाऐं कर दी गई है। रवानगी के अवसर पर महिलाओं द्वारा भव्य कलश यात्रा भी निकाली गई। जिला कलेक्टर ने मौके पर सभी ग्राम प्रमुखों को अंग वस्त्र देकर शुभकामनाऐं दी। इस दौरान अध्यक्ष जिला पंचायत देवचंद मातलाम, पुलिस अधीक्षक सुजीत कुमार सिंह, एसडीएम पवन कुमार प्रेमी, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जी.एस.सोरी, तहसीलदार यू.के.मानकर, सर्व समाज प्रमुख के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में जिलेभर से मांझी, मुखिया एवं पुजारी उपस्थित थे।

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