कोंडागांव के बांसकोट में नहीं होता रावण दहन, रामलीला में मूर्ति पर बाण चलाकर होता है वध
October 7th, 2019 | Post by :- | 164 Views

कोंडागांव( नरेश जैन)-शहर से लेकर गांव तक दशहरा में धूमधाम से रावण का पुतला दहन किया जाता है। वहीं कोंडागांव जिले के बड़ेराजपुर ब्लाक के ग्राम बांसकोट में दशहरा पर्व पर रावण दहन की सख्त मनाही है। मान्यता है कि यदि यहां पुतला दहन किया गया तो अनिष्ट की आशंका है। इसलिए यहां वर्षों पहले रावण की मूर्ति बनाई गई, जहां रामलीला के दौरान बाण चलाकर प्रतीकात्मक रूप से रावण का वध किया जाता है।

यह परंपरा 70 वर्षों से चली आ रही है। सन 1948  में यहां लगभग 12 फीट ऊंची रावण की मूर्ति का निर्माण हुआ था। तब से यहां दशहरा का पर्व मनाया जाता है। बताया जाता है कि यहां तत्कालीन बस्तर के महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव की सलाह पर ही दशहरा पर्व मनाने की शुरुआत हुई थी। यही कारण है कि यहां जगदलपुर के तर्ज पर रावण का दहन नहीं किया जाता।

70 साल पहले बनी मूर्ति
भूतपूर्व सरपंच डूडीराम मरकाम एवं ग्राम पटेल आत्माराम सिन्हा ने बताया कि सन 1948  में यहां रावण की मूर्ति का निर्माण हुआ था। 10 सिर और 20 हाथ वाली इस मूर्ति का प्रतिवर्ष रंग पेंट किया जाता है। खुले मैदान में होने के बावजूद आज भी रावण की मूर्ति जस की तस है। दशहरा पर्व पर रामलीला का आयोजन होता है। जहां एक रथ पर भगवान राम लक्ष्मण एवं सीता पहुंचते हैं तथा श्री राम एवं रावण की सेनाओं में युद्ध के पश्चात राम रावण युद्ध होता है। अंत में भगवान श्री राम द्वारा रावण का वध किया जाता है तत्पश्चात पटाखे फोड़े जाते हैं किंतु उस वक्त वहां पुतला दहन नहीं होता है।

रावण दहन को लेकर हुआ था विवाद 
ग्राम बांसकोट के ग्रामीणों ने बताया कि 4 वर्ष पूर्व यहां युवा पीढ़ी के कुछ लोग परंपरा बदलकर रावण के पुतला दहन की बात पर अड़े हुए थे। ग्राम प्रमुखों ने इसे साफ मना कर दिया था। इस पर दोनों पक्ष में विवाद हुआ। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ही मामला शांत हुआ था। किंतु उस वक्त दशहरा पर्व को तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया था।

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