आस्था का ब्रह्मसरोवर
October 7th, 2019 | Post by :- | 159 Views

अम्बाला, कुरुक्षेत्र. ( सुखविंदर सिंह ) ध्यात्मिक संस्कृति को अपने में समेटे हुए ब्रह्मसरोवर श्रद्धालुओं को तो अपनी ओर खींचता ही है साथ ही एशिया का सबसे व्यवस्थित सरोवर होने के चलते पर्यटकों का लोकप्रिय केंद्र भी बन गया है। श्रीकृष्णा सर्किट प्रोजेक्ट में शामिल होने के बाद ब्रह्मसरोवर का आकर्षण और बढ़ गया, जब धर्मनगरी के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट पास हो गया। इसी प्रोजेक्ट से ब्रह्मसरोवर के मुख्य द्वारों को विशाल और आकर्षक बनाया गया। जिसके बाद ब्रह्मसरोवर की तस्वीर बदल गई। रात को ब्रह्मसरोवर की लाइटिंग, घाट पर उकेरी हुई महाभारत पर आधारित म्यूराल और विशाल द्वार इन सबने ब्रह्मसरोवर की सुंदरता को चार चांद लगा दिए। इसके अलावा सर्दियों में 12 से ज्यादा प्रवासी पक्षियों का आगमन यहां आने वाले पर्यटकों को खासा आकर्षित करते हैं। ब्रह्मसरोवर के चारों तटों पर सबसे प्राचीन मंदिर और दो ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब स्थापित हैं। जहां हर साल लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होता है। गीता की जन्मस्थली और भगवान ब्रह्मा की वेदी कहे जाने वाले ब्रह्मसरोवर ने पिछले वर्ष 30 आइकॉन स्वच्छ स्थलों की सूची में अपना नाम दर्ज कराकर पर्यटकों को अपनी ओर खींचने पर विवश कर दिया है।
यह पक्षी पहुंचते हैं यहां : सात समुंदर पार से लाल चोंच पोचार्ड, शेर आंख पोचार्ड, पिनटेल्स, कॉमनटील, पिनटेल, नीलसिर, जलमुर्गी, काली जलमुर्गी, पनकौवा, शेड, ढोक छोटा पनकौवा आदि पक्षी सर्दियों में ब्रह्मसरोवर आने वाले पर्यटकों को अपनी अटखेलियों से आकर्षित करते हैं। पंख फैलाकर जब ये पक्षी ब्रह्मसरोवर की रैलिंग के ऊपर एक कतार में बैठते हैं तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे यहां आने वाले पर्यटकों का आगमन पर स्वागत कर रहे हों। इस सुंदर दृश्य को हर कोई अपने मोबाइल कैमरे में कैद करते हुए दिखाई देते हैं।

कुरुक्षेत्र की शान व पहचान ब्रह्मसरोवर से आस्था का नाता है तो साथ ही अब यह पर्यटन हब के रूप में भी पुख्ता पहचान हासिल कर रहा है। पूरा साल यहां श्रद्धालुओं का तांता लगता है।

ब्रह्मसरोवर तट पर स्नान के लिए जुटे श्रद्धालु। यहां साल के बारह महीने श्रद्धालुओं की जमावड़ा रहता है

किलोमीटर की दूरी पर स्थित है कुरुक्षेत्र के पिपली चौक से ब्रrासरोवर, रेलवे स्टेशन से ऑटो की सुविधा

आइकॉन स्वच्छ स्थलों की सूची में शुमार

से ज्यादा प्रजातियों के प्रवासी पक्षी यहां हर साल आते हैं

लाख एक हजार 275 क्यूबिक मीटर पानी ब्रह्मसरोवर में

ब्रह्मसरोवर के बारे में यह जानना आपके लिए बेहद जरूरी

ब्रह्मसरोवर के तट पर हर साल नवंबर-दिसंबर में गीता महोत्सव का आयोजन होता है।

सवा चार करोड़ का विशाल अष्टधातु श्रीकृष्ण अजरुन रथ। जहां आने वाले पर्यटक रथ के साथ अपनी तस्वीर खिंचवाए बिना नहीं लौटते।

सूर्यग्रहण और अमावस्या पर यहां लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए आते हें।

ब्रह्मसरोवर की आरती के लिए आनलाइन पंजीकरण

ब्रह्मसरोवर पर आरती के लिए आनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी है। दूर दराज से आने वाले श्रद्धालु अगर ब्रह्मसरोवर तीर्थ की आरती करना चाहते हैं तो वे आनलाइन दिए गए नंबरों पर संपर्क करके अपना पंजीकरण करा सकते हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, हरियाणा, हिमाचल के राज्यपाल भी तीर्थ की आरती कर चुके हैं। अब शादी की सालगिरह, जन्मदिन और किसी शुभ कार्य के होने पर श्रद्धालु मुख्य यजमान बनकर ब्रह्मसरोवर तीर्थ की आरती कर सकते हैं। पहले जयराम विद्यापीठ और कात्यानी मंदिर के वेदपाठी विद्यार्थी ब्रह्मसरोवर तीर्थ की आरती तो करते थे लेकिन वह अपने-अपने स्तर पर करते थे। मगर चार साल पहले भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने इसे गंगा की तर्ज पर आरती करने की व्यवस्था की और वहीं से आरती भी लेकर आए। अब आरती करने वाले ब्राह्मण विशेष वस्त्र धारण करके तीर्थ की आरती करते हैं। केडीबी की साइट पर आनलाइन लिंक भी दिया गया है जिस पर आनलाइन ब्रह्मसरोवर की आरती के दर्शन श्रद्धालु कर सकते हैं।

अब ब्रह्मसरोवर की मशीनों से कराई जाएगी सफाई

ब्रह्मसरोवर इतना बड़ा है कि यहां पर सफाई व्यवस्था को बनाने के लिए कई कर्मचारी सरोवर की सफाई में दिन रात लगे रहते हैं। मगर ब्रह्मसरोवर की सीढ़ियों पर काई जमने के कारण श्रद्धालुओं के फिसलने के मामले सामने आते रहते हैं। इसको देखते हुए ब्रह्मसरोवर की सीढ़ियों की सफाई अब मशीनों से शुरू करने का प्रोजेक्ट पर विचार चल रहा है। जिसका फिलहाल ट्रायल हो रहा है। इसके बाद ब्रह्मसरोवर में सीढ़ियों की सफाई मशीनों से होगी ताकि काई की समस्या से श्रद्धालुओं को निजात मिल सके। इससे ब्रह्मसरोवर में घायल होने वाले मामलों में भी कमी आएगी।

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