विचारों में टकराव, टूट रहे परिवार
October 7th, 2019 | Post by :- | 88 Views

अम्बाला, ( सुखविंदर सिंह ) घरेलू हिंसा एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी सरिता राणा का कहना है कि जैसे-जैसे समाज तरक्की कर रहा है, वैसे-वैसे लोगों की सहनशीलता और एकाग्रता कम होती जा रही है। इसका असर परिवार पर पड़ रहा है और झगड़ों के कारण परिवार टूटते जा रहे हैं।

इसके चलते उन्हें रिश्तों की भी कोई परवाह नहीं होती। ऐसे अनगिनत मामले हैं, जिनके पीछे मामूली कारण होता है। प्रेम विवाह में कुछ समय बाद ही झगड़े आरंभ हो जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि युवक-युवती दोनों ही शादी से पहले एक-दूसरे के लिए प्रत्येक कार्य करने के लिए तैयार होते हैं। इसके लिए वे अपने परिवार के सदस्यों तक से झगड़ा कर लेते हैं, मगर शादी होने के बाद उनकी इच्छाएं एक-दूसरे से अधिक होती हैं, वे इच्छाएं पूर्ण न होने पर पति-प}ी के बीच तलाक तक नौबत आ जाती है। आधुनिक परिवेश में मोबाइल भी अलगाव का मुख्य कारण बनता जा रहा है।

प्रत्येक व्यक्ति वाट्सएप व फेसबुक पर अटैच है। वे कई-कई लोगों से जुड़े हुए हैं। इससे सोशल दायरा भी खत्म होता जा रहा है। मौजूदा समय में प्रत्येक व्यक्ति खुद की निजी राय रखता है व इसमें किसी की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं करता।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ.विजेंद्र सिंह बजाड़ का मानना है कि जरूरत है युवाओं को पारिवारिक जीवन के लिए तैयार करने की, क्योंकि दांव पर कौन है, वे जिनका कोई दोष नहीं है, जो अबोध हैं अर्थात बच्चे।
सेवा सिंह ’ करनाल
परिवारिक रिश्ते लगातार कमजोर होते जा रहे है। छोटी-छोटी बातों से शुरू होने वाली बहस रिश्ते टूटने व परिवार बिखरने तक पहुंच रही है। परिवारों में यह बिखराव हालांकि घरेलू ¨हसा के विभिन्न कारणों से आ रहा है। इसमें भी सबसे बड़ा कारण आसानी से मिलने वाले नशीले पदार्थो को माना जा रहा है। करीब हर दूसरे दिन ऐसा मामला परिवार परामर्श केंद्रों तक पहुंच रहा है। महिला थाना में स्थापित किए गए परिवार परामर्श केंद्र के अनुसार यहां पहुंच रहे घरेलू ¨हसा के मामलों में करीब 70 फीसद शराब से जुड़े हुए ही पाए गए है। जनवरी से केंद्र में 105 मामले पहुंच चुके हैं और इनमें से 50 मामले शराब व अन्य नशीले पदार्थो से जुड़े पाए गए हैं।

राह सिंह
प्रेम विवाह किए छह महीने ही हुए थे कि विवाहित जोड़े ने अलग होने का फैसला कर लिया। मामला जब परिवार परामर्श केंद्र तक पहुंचा तो पता चला कि दोनों के अब विचार नहीं मिलते। क्या ये विचार प्रेम विवाह से पहले नहीं मिलते थे, यह सवाल उठा तो जवाब आया कि तब ऐसा सोचा ही नहीं गया। दरअसल, विवाह के बाद एक-दूसरे को टोका-टाकी करनी शुरू कर दी। पहनावे को लेकर किचकिच होने लगी। यहां तक की यह ताने दिए जाने लगे कि विवाह से पहले पति टाइम देता था, पर अब स्थितियां वैसी नहीं रहीं। परिवार परामर्श केंद्र ने दोनों को समझाया। साथ ही कहा, अगर पहले ही दिखावा करने के बजाय सच से दोनों रूबरू होते तो ये नौबत न आती। यानी, रिश्ते वही सफल होते हैं, जिनमें विश्वास और सच की नींव होती है।

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