(विजयदशमी पर विशेष)
October 7th, 2019 | Post by :- | 96 Views

इस बार विजयदशमी पर करना है दहन अपने अन्दर के रावण का….

(आर्यवीर लायन विकास मित्तल, मुख्य संयोजक पलवल डोनर्स क्लब “ज्योतिपूंज”)

मुकेश वशिष्ट/हसनपुर पलवल

क्या आप जानते है कि दशहरा क्यों मनाया जाता है ? दोस्तो हम सब जानते हैं कि बुराई पर अच्छाई की जीत, असत्य पर सत्य की जीत की खुशी को मनाने के लिए हम इस त्यौहार को मनाते हैं । इस दिन बुराई रुपी रावण का अंत अच्छाई रुपी राम के द्वारा किया गया था। वैसे रावण अत्यंत ही विद्वान पंडित था लेकिन अपने अहंकार के कारण आज भी उसको बुराई के रूप में ही याद किया जाता हैं कोई उसकी पूजा नहीं करता सब उसकी भर्त्सना ही करते हैं क्योकि अपने अहंकार के कारण उसने ज्ञान रुपी सीता माता का अपहरण किया और अपने हठ के कारण श्री राम के द्वारा मारा गया …..क्या वास्तव में

रावण का अंत हो गया ? नही! नही !नही ! रावण आज भी  बुराइयो के रूप में आज भी हमारे बीच उपस्थित हैं । आज भी उन बुराइयों को देखा जा सकता है .जो की हम सबमें कहीं न कहीं पाई जाती हैं मतलब यह है कि हर विजयदशमी के दिन जलता हुआ रावण अपने सामने खडे हुए लोगो से एक प्रश्न पूछता नजर आता है “क्या आप लोगो के  बीच कोई राम है ?

पलवल डोनर्स क्लब “ज्योतिपुंज” के मुख्य संयोजक आर्यवीर लायन विकास मित्तल कहते है कि रावण का एक नाम दशानन भी है जिसका मतलब दश सिर वाला। रावण हरेक सिर एक बुराई का प्रतीक है।अगर हमे यह त्यौहार अच्छे से मनाना हैं तो हमें अपने अंदर छुपी हुई  बुराइयों को भी समाप्त करने का प्रण लेना चाहिए तभी इस त्यौहार का महत्व सफल होगा ……..

ये दस बुराइयाँ हैं |

  1.   अहंकार :- मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी उसका अपना अहंकार होता है.. स्वाभिमान होना अच्छी बात       है पर अगर वह अहंकारी हैं तो ये उसकी बहुत ही बड़ी कमजोरी बन जाती है. अतः हमें अहंकार रुपी बुराई     का परित्याग करके एक अच्छा इन्सान बनने की कोशिश करनी चाहिए।

     2. क्रोध :- मनुष्य के अंदर दूसरी बड़ी बुराई है उसका अपना क्रोध । क्रोध के कारण व्यक्ति सही और गलत             का फैसला नहीं कर पाता । जिसके कारण वह गल्तियों पर गल्तियाँ करता रहता हैं अतः रावण रुपी क्रोध             को भी आज के दिन से खत्म करने का प्रयास करना चाहिए।3. दुर्व्यसन :- मनुष्य के अंदर बहुत सारे

     3. दुर्व्यसन  :-  जैसे की धुम्रपान करना , झूठ बोलना, शराब पीना, मारना- पीटना , आदि आदि। अगर                     व्यक्ति इन सब दुर्व्यसनो से दूर रहे तो काफी हद तक अच्छा इंसान कहला सकते हैं अतः आज के                       दिन हम सबको ये शपथ लेनी चाहिए की हम इन सब दुर्व्यसनो से दूर रहेंगे और अपने आस पास                       के लोगो को भी दूर रहने के लिए जागरूक करेंगे ।

      4. आलस्य:- मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु आलस्य है । आलस्य से दूर रहकर भरपूर मेहनत करनी चाहिए                  इससे समाज में सम्मान के साथ साथ सुख सुविधाए भी मिलेगी । अगर व्यक्ति मेहनत करके खायेंगे तो            किसी की कभी नहीं सुननी पड़ेगी और उसका स्वाभिमान भी बना रहेगा।

     5. कटु वचन:- मनुष्य जब क्रोधित होता है तो न जाने क्या-२ बोल जाता है । तब उसको अहसास नहीं होता             की उसके द्वारा बोले गए कटु वचन किसी को कितना आहत कर जाते हैं और उसकी अपनी छवि भी                   ख़राब हो जाती है ।अतः किसी को कभी भी कटु वचन नहीं बोलने का प्रण लेना जाहिए।

    6. विवेकहीनता :- मनुष्य कभी -2 अपना विवेक खो देता है जिसके कारण वो बहुत सी भूल कर जाता है हम             सब को इन्सान रुपी जन्म मिला है ताकि हम सब सोच सके और फिर कोई निर्णय ले किसी भी परिस्थिति            में अपने विवेक को बनाये रखने का प्रण लेना है।

   7. अज्ञानता :- अज्ञानता एक ऐसी बुराई है की उसके कारण ही हम वो कर जाते हैं जो की आगे चलकर हमें               नुक्सान देता है । अतः हमें अपनी अज्ञानता को दूर करना चाहिए । ज्ञान अर्जित करने कि कोई उम्र नहीं             होती मनुष्य हर पल ज्ञान अर्जित करता है और मृत्यु पर्यंत करता रहता है । अतः ज्ञानशील बनना चाहिए ।

  8. जलन:- महावीर इंटरनेशनल पलवल उडान की चैयरपर्सन वीरा अल्पना मित्तल बताती है कि आज सब एक         ही वजह से दुखी रहते हैं की मेरा पडोसी, मेरा रिश्तेदार इतना सुखी क्यो है ।अरे आप अपने सुखो को देखिये,         दुसरो के सुखो से अपने को दुखी कर लेते हैं जिसके कारण व्यक्ति अपनी मन की शान्ति खो बैठते है। अतः         जलन को अपने करीब भी नहीं आने का प्रण ले।

  9. डर :- डर एक ऐसी बुराई है जो अगर आप पर हावी हो गयी तो आपके लिए सही नहीं है । किसी भी प्रकार के         डर को अपने पर हावी नहीं होने देना चाहिए ।क्योकि कहा गया है कि डर के आगे जीत है ।

 10.  असफलता :- आर्यवीर लायन विकास मित्तल कहते है कि सफलता और असफलता हर व्यक्ति के साथ              जुडी हुयी होती हैं कभी कोई काम सफल हो जाता है तो कभी कोई असफल भी हो जाता है लेकिन                        असफलता को अपने पर हावी ना होने दे ।

दोस्तों हम सब को अपने अंदर छिपे हुए इन दश रावण रुपी कमियों को दुर करके  एक अच्छा इन्सान बनने की कोशिश करनी है। असम्भव कुछ भी नहीं है । अतः विजयदशमी के पावन अवसर पर आओ अपनी इन सब बुराइयों और कमियो को छोड़कर अच्छाइयों कि तरफ अग्रसर हो जाये. और आज दशहरे के दिन अपने ऊपर विजय प्राप्त करलें। सभी को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

 

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