संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का पांचवा दिन
March 15th, 2022 | Post by :- | 296 Views
कालका (रोहित शर्मा) । शिव शक्ति मंदिर पपलोहा में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कथावाचक पंडित राजकुमार रसिक जी महाराज ने कथा के दौरान कहा कि सत्संग मानव का जीवन सुधार देता है। उन्होंने कहा कि भगवान किसी के रूप, जाति, विद्या, बल से प्रसन्न नहीं होते बल्कि भाव से प्रसन्न होते हैं। भाव नहीं है तो चाहे छप्पन भोग हो उनका त्याग कर दते हैं और जहां प्रेम है वहां विधुरानी के छिलकों से प्रसन्न। उन्होंने कहा कि पदार्थ दुनिया को दो और प्रेम परमात्मा से करो जबकि हम उल्टा करते हैं। हम प्रेम तो संसार से करते हैं और पदार्थ भगवान को दिखाते हैं, परंतु प्रभु सांसारिक प्रेम की परिभाषा नहीं जानते। संत कहते हैं कि कन्हैया केवल निस्वार्थ प्रेम को ही जानते हैं। पंडित राजकुमार रसिक ने कहा कि जिन्होंने प्रेम किया है उन्होंने प्रभु को जरूर पाया है।

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