आरक्षित सीट पर विजय हासिल कर क्या इतिहास बना पायेगी बसपा
September 30th, 2019 | Post by :- | 91 Views

यमुनानगर, लोकहित एक्सप्रेस(सुरेश अंसल)। हरियाणा में विधानसभा का बिगुल बज चुका है। सभी पार्टियां कैसे चुनाव जीता जाए जुगत-जुगाड़ में एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं। बसपा भी इससे अछूती नही है। हमेशा दलितों की पक्षधर रही बसपा अभी तक हरियाणा आरक्षित सीट पर एक बार भी नही जीत हासिल कर पाई। जबकि अनारक्षित सीटों पर पार्टी ने कई बार कब्जा किया।
इनमे जगाधरी सीट पर 2 बार, छछरौली, नारायणगढ़ व पृथला क्रमशः सीट एक बार प्रमुख रही। 1991 में नारायणगढ़ विधानसभा सीट से जीत कर आये बसपा विधायक सुरजीत कुमार से लेकर 2014 में पृथला सीट से टेकचंद शर्मा तक अभी तक कि रिपोर्ट तो ये ही बताती है कि दलितों की पार्टी होने के बावजूद भी इस पार्टी का रिज़र्व सीट से आज तक भी कोई विधायक नही बन पाया। कारण बहुत से हो सकते हैं। परंतु जो समीकरण बताते हैं। उससे तो ये ही निकल कर सामने आता है कि रिज़र्व सीट पर सभी चुनाव लड़ने वाले कैंडिडेट लगभग एक ही कैटेगिरी से होते हैं। इसका स्पष्ट मतलब ये निकलता है कि बसपा को केवल पार्टी वोट या रसूक के वोट ही मिल पाते हैं। जबकि अन्य पार्टियों से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी वोट प्रतिशतता जरनल वोटर लेकर में आगे निकल जाते है। ओर जीतने का कारण बनते हैं। यही कारण है कि आरक्षित सीट पर आज तक भी हरियाणा से कोई विधायक चुनाव जीत कर विधानसभा पहुच नही पाया। वही जरनल सीट पर इसी पार्टी पा प्रदर्शन उम्मदा तो नही पर अच्छा तो रहा ही है। इसी का कारण रहा है कि नेता इसी पार्टी से जीत हासिल करके विधान सभा तक पहुचे। चाहे बाद में उन्होंने अपना पल बदल लिया हो। इनमे जगाधरी से डॉ. बिशन लाल सैनी 2000 में विधायक बने जो कि अब कोंग्रेस पार्टी में,2005 में छछरौली सीट से जीत कर आए पूर्व विधायक अर्जन सिंह अब जजपा में, जगाधरी से ही 2009 में पूर्व विधायक अकरम खान अब कांग्रेस में इसके साथ ही पृथला से सत्ता का सुख भोग चुके टेकचंद शर्मा का बसपा से निष्काशन के बाद अब बीजेपी पार्टी में जुड़ चुके हैं।

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