अब तक हुए विधानसभा चुनावों में हथीन की जनता ने छोटे दलों व निर्दलीय प्रत्याशियों पर जताया है भरोसा,भाजपा कांग्रेस की चिंताएं बढ़ी
September 29th, 2019 | Post by :- | 198 Views

मेवात (सद्दाम हुसैन) हथीन विधानसभा की जनता ने अब तक हुए 12 विधानसभा चुनावों में ज़्यादातर छोटे दलों व निर्दलीय प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है।और यहां की जनता की ख़ास बात यह रही है की उन्होंने प्रदेश की लहर के विरुद्ध वोट डालकर विधायक चुने हैं। हालांकि हथीन से देवीसिंह तेवतिया पहली बार कांग्रेस पार्टी की टिकट पर विधायक बने तो मास्टर अजमत खान कांग्रेस पार्टी की टिकट पर दूसरे विधायक जीते ।

क्षेत्र के मतदाताओं ने जनता पार्टी, इनैलो,हविपा व निर्दलीय प्रत्याशियों पर ज्यादा भरोसा जताया। हरियाणा प्रदेश बनने के बाद हुए 12 विधानसभा चुनावों में भाजपा पार्टी की लहर में भी अपने विधायक हथीन से जिताने में कामयाब नहीं हो सकी। हालांकि 2014 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने पूर्व मंत्री हर्ष कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया था लेकिन उन्हें भी हार सहन करनी पड़ी। भाजपा के लिए हथीन से सीट निकालना मुश्किल ही नहीं टेढ़ी खीर नजर दिखाई दे रही है क्योंकि आज की स्थिति में सबसे ज्यादा टिकटार्थी नेताओं की भीड़ उन्हीं के पास है।टिकट वितरण के समय मचने वाली भगदड़ से भाजपा को नुक्सान लाजमी दिखाई पड़ रहा है हालांकि मुख्यमंत्री ने बहीन में आयोजित हुए किसान सम्मेलन में सभी को बातों ही बातों में साधने की कोशिश की थी।

कांग्रेस पार्टी की टिकट पर हथीन हल्के से दो बार विधायक बने हैं।इनमें कोंडल निवासी देवीसिंह तेवतिया व मलाई निवासी अजमत खान कांग्रेस की टिकट पर जीते हैं।।बाकी जितने भी प्रत्याशी कांग्रेस पार्टी ने मैदान में उतारे उन्हें हार सहन करनी पड़ी।

1966 में हरियाणा बनने के बाद यहां पर हुए 12 विधानसभा चुनाव में यहां से तीन बार मुस्लिम मेव उम्मीदवार जीते हैं जबकि 9 बार जाट समुदाय के खाते में यह सीट गई थी।यहां पर हमेशा जाट व मेव प्रत्याशियों का वर्चस्व रहा है।1977 की इमरजेंसी के चुनाव को छोड़ दिया जाए तो यहां के मतदाता कभी लहर के साथ नहीं रहे।1967 में हथीन से कांग्रेसी उम्मीदवार के तौर पर चौधरी देवी सिंह तेवतिया पहली बार विधायक बने।

1968 में निर्दलीय चौधरी हेमराज सरावत ने कांग्रेस के देवी सिंह को 70 वोटों के अंतर से हराया इसके बाद 1972 में यहां से सत्ता विरोधी लहर उठी और उस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रामजीलाल डागर ने कांग्रेश के प्रत्याशी हेमराज को 4476 वोटों से पराजित किया रामजीलाल सादा छवि के प्रत्याशी रहे हैं सभी चुनाव यहां पर गोत्र पाल के आधार पर लड़े गए। 1977 में इमरजेंसी के बाद सरकार से नाराजगी के कारण लोगों ने जनता पार्टी की लहर के चलते यहां पर स्वामी आदित्य वेश को भारी मतों से जिताया था। स्वामी आदित्य वेश निर्दलीय प्रत्याशी छुटमल खान को 5665 वोटों के अंतर से हराया‌।

1982 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी की टिकट पर अजमत खान ने चुनाव जीता।इस चुनाव में उन्होंने 173 वोटों से जीत गए। 1987 के चुनाव में लोकदल के टिकट पर ऐतिहासिक गांव बहीन के भगवान सरावत विजयी हुए उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी रामजीलाल डागर को 9984 वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की।

1991 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अजमत खां ने भगवान सहाय रावत को हराया1996में हविपा के हर्ष कुमार ने अजमत खां को 6121मतों से पराजित किया। 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में इंडियन नेशनल लोकदल के भगवान सहरावत ने हरियाणा विकास पार्टी के हर्ष कुमार को हराकर दूसरी बार यहां से विधानसभा पहुंचे। 2005 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी हर्ष कुमार ने कांग्रेस के चौधरी जलेब खान को 8830 वोटों से हराकर दूसरी बार विधायकी प्राप्त की।

2009 में निर्दलीय प्रत्याशी चौधरी जलेब खान ने कांग्रेस के हर्ष कुमार को 6473 वोटों से हराकर पहली बार विधायक बनने का सपना पूरा किया।2014 के चुनाव में इनेलो के केहर सिंह ने हर्ष कुमार को हराकर सीट अपने कब्जे में की। अब देखना होगा की हथीन की जनता छोटे दल के प्रत्याशी पर भरोसा जताती है या भाजपा को खाता खोलने का मौका देती है लेकिन यह तो समय ही बताएगा की हथीन की जनता कैसा प्रतिनिधि चाहती है?

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