आईओ वेदपाल को डीजीपी ने दुष्कर्म के अपराधी को सजा दिलवाने में अहम भूमिका निभाने पर प्रशस्तिपत्र देकर किया सम्मानित
December 19th, 2021 | Post by :- | 70 Views

यमुनानगर, (अंसल)। आईओ मतलब जांच अधिकारी की भूमिका बहुत ही अहम हो जाती है। जब दुष्कर्म जैसे अपराध का कोई केस सामने हो। ओर यह परीक्षा और भी कड़ी हो जाती है जब पीड़िता बच्ची हो तो जांच अधिकारी की सूझबूझ ,  पैनी नजर और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। अपनी इसी सजगता, पैनी नजर और सूझबूझ से गुरु अर्जुन नगर चौकी इंचार्ज वेदपाल ने पोक्सो एक्ट के तहत एक अपराधी को 20 साल की सजा दिलवाई है। इस सजा का सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य बना भ्रूण। जिसे गर्भपात के बाद उन्होंने मधुबन एफएसएल में सुरक्षित रखवा लिया था। इस भ्रूण की डीएनए जांच के  बाद अपराधी की करतूत पुख्ता हो गई। अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए 20 साल की सजा सुनाई। एएसआई वेदपाल की इस सूझबूझ और कार्यकुशलता को देखते हुए डीजीपी पीके अग्रवाल  ने उन्हें दस हजार रुपए के साथ प्रश्स्ती पत्र देकर सम्मानित भी किया, इससे पहले एसपी कमलदीप गोयल भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। वेदपाल इस मामले को याद करते हुए बताते है कि यह एक बहुत ही उलझी हुई गुत्थी थी। जिसे सुलझाना इतना आसान नहीं था। जगाधरी की दुर्गा कालोनी में एक 13 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ था। बच्ची शुरूआत में अपराधी की जानकारी नहीं दे रही थी। मामला जैसे ही एएसआई वेदपाल के संज्ञान में आया तो उन्होंने जांच शुरू कर दी। शुरूआत में ही उनका शक लड़की के 21 वर्षीय ममेरे भाई राजबीर  पर गया। लेकिन जब जब पुख्ता सुबूत न मिले, तब तक उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता था। पीड़िता काउंसलिंग में भी अपराधी का नाम नहीं बता पा रही थी। तब वेदपाल ने इस केस को चुनौती तरह लिया। उन्हें पहले ही राजबीर पर शक तो था, लेकिन सुबूत नहीं था। वेदपाल ने बताया कि इधर पीड़ित की हालत गंभीर हो रही थी। उसे इलाज के लिए पीजीआई ले जाया गया। जहां उसका गर्भपात किया गया। यहां वेदपाल ने डाक्टरों के सहयोग से भ्रूण को मधुबन एफएसएल में रखवा दिया। यहां ही वेदपाल ने डाक्टरों से यह भी सलाह कि  पीड़ित के साथ दुष्कर्म कितनी बार हुआ। डाक्टरों ने जांच अधिकारी वेदपाल को बताया कि मेडिकल जांच में यह पता चल रहा है कि दुष्कर्म बार बार हुआ है। इस पर वेदपाल को यकीन हो गया कि अपराधी कोई जानपहचान का है। अब पीड़ित डर और दबाव की वजह से उसका नाम नहीं बता रही है।
वेदपाल ने तब  मोबाइल नंबर  के आधार पर जांच को आगे बढ़ाते हुए छानबीन की। राजबीर के बारे में कुछ सुबूत पुलिस को मिले तो उससे जब कड़ी पूछताछ की तो उसने गुनाह कबूल कर लिया। वेदपाल ने बताया कि असली चुनौती यह थी कि अपराधी को कोर्ट में सजा दिलवाना, इसके बाद उन्होंने सभी साक्ष्य को जुटाया। बकायदा से नियमित जांच करते हुस पुख्ता सुबूत जुटाए। मामला फास्र्टट्रैक कोर्ट में गया।
यहां एक बार फिर से पीड़िता कोर्ट में बयान से मुकर गई। तब जांच अधिकारी वेदपाल ने भ्रूण के डीएनए  के मिलान को राजबीर के डीएनए से कराने की गुजारिश अदालत से की। जांच को अदालत में रखा तो कोर्ट ने भी राजबीर को अपराधी मानते हुए उसे 20 साल की सजा के साथ साथ 30 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया।

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