कभी भी बिना आमंत्रण किसी के घर नहीं जाना चाहिए, जीवन साथी की बात का अनादर न करें
August 17th, 2019 | Post by :- | 11 Views

शिवजी और माता सती से जुड़ी एक कथा बहुत प्रचलित है। ये कथा श्रीमद् देवी भागवत, शक्तिपीठांक सहित कई ग्रंथों में बताई गई है। इस कथा के अनुसार माता सती के पिता प्रजापति दक्ष थे। सती ने भगवान शिव से विवाह किया था। प्रजापित दक्ष ने हरिद्वार में भव्य यज्ञ का आयोजन किया और इस यज्ञ में सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन शिव और सती को आमंत्रित नहीं किया। दक्ष शिवजी को पसंद नहीं करते थे।
देवर्षि नारद ने माता सती को बताई ये बात
माता सती को नारद से ये बात मालूम हुई कि उनके पिता दक्ष यज्ञ करवा रहे हैं। सती इस यज्ञ में जाने के लिए तैयार हो गईं। शिवजी ने माता सती को समझाया कि बिना आमंत्रण हमें यज्ञ में नहीं जाना चाहिए, लेकिन शिवजी के समझाने पर भी वह नहीं मानीं। शिवजी के मना करने के बाद भी सती अपने पिता के यहां यज्ञ में चली गईं।
दक्ष ने सती के सामने किया शिवजी का अपमान
जब सती यज्ञ स्थल पर पहुंची तो उन्हें मालूम हुआ कि यज्ञ में शिवजी के अतिरिक्त सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया है। ये देखकर सती ने पिता दक्ष से शिवजी को न बुलाने का कारण पूछा। जवाब में दक्ष ने शिवजी का अपमान किया। शिवजी का अपमान सती से सहन नहीं हुआ और उन्होंने हवन कुंड में कूदकर अपने प्राणों की आहूति दे दी।
जब ये समाचार शिवजी तक पहुंचा तो वे बहुत क्रोधित हुए। शिवजी के कहने पर वीरभद्र ने दक्ष का सिर काट दिया।
कथा की सीख
इस प्रसंग से हमें ये सीख मिलती है कि कभी भी बिना आमंत्रण किसी के घर या कार्यक्रम में नहीं जाना चाहिए। जीवन साथी कोई भी सही बात कहे तो उसे तुरंत मान लेना चाहिए, उसका अनादर नहीं करना चाहिए। पुत्री या किसी भी स्त्री के सामने उसके पति की बुराई या अपमान नहीं करना चाहिए।